Monday, April 19, 2010

लम्बे और गहरे श्वास के लाभ

प्राणायाम प्राण याने सांस आयाम याने दो सांसो मे दूरी बढ़ाना, श्‍वास और नि:श्‍वास की गति को नियंत्रण कर रोकने व निकालने की क्रिया को कहा जाता है।

श्वास को धीमी गति से गहरी खींचकर रोकना व बाहर निकालना प्राणायाम के क्रम में आता है। श्वास खींचने के साथ भावना करें कि प्राण शक्ति, श्रेष्ठता श्वास के द्वारा अंदर खींची जा रही है, छोड़ते समय यह भावना करें कि हमारे दुर्गुण, दुष्प्रवृत्तियाँ, बुरे विचार प्रश्वास के साथ बाहर निकल रहे हैं । हम सांस लेते है तो सिर्फ़ हवा नही खीचते तो उसके साथ ब्रह्मान्ड की सारी उर्जा को उसमे खींचते है। अब आपको लगेगा की सिर्फ़ सांस खीचने से ऐसा कैसा होगा। हम जो सांस फेफडो मे खीचते है, वो सिर्फ़ सांस नही रहती उसमे सारे ब्रम्हन्ड की सारी उर्जा समायी रहती है। मान लो जो सांस आपके पूरे शरीर को चलाना जनती है, वो आपके शरीर को दुरुस्त करने की भी ताकत रखती है। प्राणायाम निम्न मंत्र (गायत्री महामंत्र) के उच्चारण के साथ किया जाना चाहिये।

ॐ भूः भुवः ॐ स्वः ॐ महः, ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम् ।
ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।
ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं, ब्रह्म भूर्भुवः स्वः ॐ ।


लम्बे और गहरे श्वास के लाभ

तनाव कम होता है.
कार्य क्षमता बढ्ती है.
आत्मविश्वास बढ्ता है.
भावुकता नियंत्रित होती है.
रक्तचाप नियंत्रित होता है.
आंतरिक प्रदूषण दूर होता है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ्ती है.
शांति और ताजगी प्राप्ति होती है.
अनावश्यक चिंतन दूर होता है.
स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ्ती है.


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